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सदाचार के तावीज़ से परसाई के बोल गूँजे इप्टा के राज्य सम्मेलन में

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*इंदौर।*
वैचारिक रूप से जनप्रतिबद्ध कला और जन संस्कृति का संरक्षक और संवाहक भारतीय जन नाट्य संघ का मध्य प्रदेश का दसवां राज्य सम्मेलन छत्तीसगढ़ की सीमा के निकट स्थित अनूपपुर के बलराज साहनी सभागृह में संपन्न हुआ। प्रदेश के विभिन्न अंचलों से आये कलाकारों ने, देश-दुनिया के मौजूदा हालात पर गंभीरता से चिंतन-मनन किया और नाट्य विधा की विभिन्न प्रस्तुतियाँ पेश कीं। आयोजन में इप्टा इंदौर इकाई द्वारा हरिशंकर परसाई की कहानी पर आधारित "सदाचार का तावीज़" की नाट्य प्रस्तुति ने दर्शकों को ठहाके लगाने के साथ-साथ सोचने पर विवश कर दिया। यही परसाईजी की लेखनी की विशेषता भी थी। विगत दिनों इंदौर में इसी नाटक के सफल मंचन पश्चात इंदौर इकाई के कलाकारों ने मुंबई से आये फिल्म और टीवी अभिनेता राजेंद्र गुप्ता, इलाहाबाद के प्रसिद्ध निर्देशक अनिल रंजन भौमिक,  हिमांशु राय (जबलपुर) एवं अन्य शहरों से आये दर्शकों के साथ अनूप नगर के सैकड़ों सुधी दर्शकों की उपस्थिति में नाटक "सदाचार का तावीज़" की प्रस्तुति दी। राजा बने शब्बीर हुसैन, मंत्री विशाल यादव, आयुष अहिरवार साधु बने, हरनाम सिंह, दोहरी भूमिका निभाती मंदसौर इकाई की हूर बानो सैफी के अलावा नकुल पाल, राजवीर रायकवार, सूत्रधार विनीत तिवारी एवं पर्दे के पीछे यशपाल ने अपनी-अपनी भूमिका निभायी। गुलरेज़ ख़ान के निर्देशन तथा विनीत तिवारी और सारिका श्रीवास्तव की पटकथा और संयोजन में नाटक बिल्कुल सादगी के साथ प्रस्तुत किया गया लेकिन उसका प्रभाव दर्शकों पर ज़बरदस्त रहा। 

सम्मेलन में अभिनेता राजेंद्र गुप्ता ने जनकवि धूमिल की कविता "पटकथा" का एकल मंचन किया। प्रयागराज (इलाहाबाद) की समानांतर संस्था ने "असमंजस बाबू", इप्टा लखनऊ के कलाकारों ने स्वतंत्रता संग्राम के 100 वर्षों की अवधि को समेटे हुए क्रांतिकारी अशफाक उल्ला की "दास्तान-ए-अशफाक" को किस्सागोई से तथा विवेचना इप्टा जबलपुर ने "72 मील" नाटक के माध्यम से हमारे समाज की विसंगतियों पर चोट की और दर्शकों का मन मोह लिया।

राज्य सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए वरिष्ठ रंगकर्मी और इप्टा के राष्ट्रीय कार्यवाहक अध्यक्ष राकेश वेदा (लखनऊ) ने कहा कि वर्तमान समय विश्व के लिए उलझन भरा है। लेखक, रंगकर्मी, पेंटर अपने-अपने माध्यमों से इसे अभिव्यक्त कर रहे हैं। उन्होंने इप्टा के इतिहास की जानकारी देते हुए कहा कि भारतीय जन नाट्य संघ का गठन युद्ध-विरोधी दौर में तब हुआ था, जब हिटलर रूस को पराजित कर भारत को जीतना चाहता था। वर्तमान में यही भूमिका अमेरिका और इज़रायल की है। राकेश वेदा ने दुनिया को युद्ध में झोंकने के लिए अमेरिका के डोनाल्ड ट्रंप और इज़राइल के बेंजमिन नेतन्याहू को लानत भेजते हुए कहा कि "जंग में क़त्ल सिपाही होंगे, सुर्ख़रू ज़िल्ले इलाही होंगे।"

विभिन्न सत्रों में राष्ट्रीय इप्टा सचिव मंडल के सदस्य शैलेंद्र (पलामू) ने कहा कि दुनिया विश्व युद्ध के मुहाने पर बैठी है। राजनीति करने वाले जन-भावनाओं को नहीं सुन रहे हैं। विश्व स्तर पर लूट, बच्चों का मारा जाना पैशाचिक कृत्य है। बर्बरता से प्रारंभ मानवता अरसे बाद प्रेम, दया और करुणा तक पहुंची है। संस्कृतिकर्मी मानवता को जीवित रखेंगे। उन्होंने अफ़सोस ज़ाहिर करते हुए कहा कि वियतनाम युद्ध के दौरान साम्राज्यवादी अमेरिका का विरोध करने वाला भारत, वर्तमान में जारी युद्ध पर मौन है। देश में धर्म के नाम पर पाखंड को प्रोत्साहित किया जा रहा है। वैज्ञानिक चेतना के अभाव में उत्पीड़न बढ़ा है। मनुष्यता की रक्षा के लिए ही संस्कृति विकसित होती है। लोक-मंगल की कामना ही कला की धुरी है।

           इप्टा के राष्ट्रीय सचिव विनीत तिवारी (इंदौर) ने कहा कि वर्तमान समय वर्चस्व टूटने का है। पूँजीवादी ताक़तें चाहती हैं कि आम लोगों की संवेदनशीलता ख़त्म हो जाए। वे किसी की मौत पर दुखी न हों और अन्याय के ख़िलाफ़ ख़ामोश रहें। इप्टा यह नहीं होने देगी। संवेदनशीलता को बचाए रखने की ज़रूरत है। युद्ध के शोर में मणिपुर की त्रासदी को भुला दिया गया है। संस्कृतिकर्म केवल नाटक करना ही नहीं है, इंसानियत और मानवीय विवेक के संस्कार पैदा करना भी है। अगर लालच की हवस ख़त्म नहीं होती तो न्याय की उम्मीद और न्याय के लिए लड़ाई भी कभी समाप्त नहीं होगी। दुनिया नफ़रत से संचालित नहीं होती। ईरान और फ़लस्तीन की जनता हमें बहादुर होना सिखाती है। इप्टा का काम अमन और मोहब्बत का विस्तार करना है। देश के शासक भारत को अमेरिका और इज़रायल का चाटुकार बनाना चाहते हैं। हम फिलिस्तीन और ईरान की पीड़ित जनता के साथ हैं। विनीत तिवारी ने कहा कि अपने देश से प्यार करने के लिए ज़रूरी नहीं है कि दूसरे देश से नफ़रत की जाए। युद्ध के कारणों में डॉलर के वर्चस्व को चुनौती मिलना भी रहा है।

              प्रगतिशील लेखक संघ के राज्य सचिव सत्यम पांडे (भोपाल) ने कहा कि तमाम चुनौतियों के बावजूद यह सम्मेलन एक उपलब्धि है। धर्म के नाम पर राजनीति विस्तारित हो रही है। इप्टा के आंदोलन की चिंता यह है कि संस्कृति को बाज़ारवाद से कैसे बचाया जाए।

              वरिष्ठ रंगकर्मी सुश्री वेदा राकेश (लखनऊ) ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों से सभी परिचित हैं। समय कभी समस्या-विहीन नहीं होता। प्रतिकूल परिस्थितियों में पैर जमा कर खड़े रहने की जरूरत है। गोविंद पानसरे, दाभोलकर, गौरी लंकेश, कलबुर्गी को उनकी अभिव्यक्ति के कारण सत्ता-आश्रित तत्वों ने मार डाला। ऐसा पहले भी हुआ है। गैलीलियो से भी पहले ब्रूनो को जला दिया गया था। लेकिन सच की लड़ाई जारी रहती है, कभी सतह के ऊपर कभी सतह के नीचे।

              खगोल विज्ञानी अमिताभ पांडे के अनुसार संस्कृति, प्रकृति और समाज के संबंधों को निर्धारित करती है। विज्ञान ने हमें यह ताक़त दी है कि वह मिथ्या कल्पनाओं को उस काल की समय-अवधि में विश्लेषण कर सके। मनुष्य ब्रह्मांड में अपनी औक़ात नहीं समझ पा रहा है, यह उसकी सबसे बड़ी कमजोरी है।

              'समय के साखी' पत्रिका की संपादक आरती (भोपाल) ने कहा कि अमेरिकी जनता अपने राष्ट्रपति का त्यागपत्र चाहती है, वह युद्ध के माध्यम से जारी मानवीय त्रासदी का हिस्सा नहीं बनना चाहती। युद्ध में शामिल कई लोग आत्मग्लानि के चलते आत्महत्या करने पर विवश हुए हैं। कला माध्यमों का उपयोग मानवीय पीड़ा की अभिव्यक्ति के लिए होना चाहिए। 'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता' एक कला मूल्य ही नहीं, वृहत्तर मानवीय मूल्य है लेकिन उसे भी देश, काल के अनुसार देखना चाहिए।

             इप्टा के प्रांतीय महासचिव शिवेंद्र शुक्ला (छतरपुर) ने कहा कि दुनिया पर युद्ध थोपा गया है। इसकी विभीषिका से विश्व जल रहा है। सभी देश युद्ध के परिणामों से प्रभावित हो रहे हैं। भारत में झूठ को सच बनाकर प्रचारित किया जा रहा है। सच बोलने वाले दमन का शिकार हो रहे हैं। वर्तमान में प्रतिरोध के स्वरों को मज़बूत करने की जरूरत है।

          "इप्टा की परंपरा और सृजनात्मक स्पेस: स्थानीय नाट्य संस्थाओं की भूमिका पर हिमांशु राय।"नाट्य शिविरों की उपयोगिता एवं संगठन निर्माण" विषय पर हरिओम राजोरिया ने विचार रखे।
          क्रैडेंशियल कमेटी की रिपोर्ट अमित पोखरियाल ने प्रस्तुत की। प्रस्ताव एवं राजनीतिक संगठनात्मक रिपोर्ट का अनुमोदन समीक्षा ने किया

*प्रस्ताव जो पारित हुए*

              सम्मेलन में प्रतिनिधियों द्वारा विभिन्न प्रस्ताव रखे गए, जिन्हें सर्वानुमति से पारित किया गया। प्रस्तावों में भारत सरकार द्वारा आक्रामक और अवैध क़ब्ज़ा करने वाले इज़रायल से मित्रता का विरोध करते हुए मांग की गई कि सरकार इज़रायल से अपने संबंध समाप्त करे। युद्ध-विराम के बावजूद गाज़ा में फ़लस्तीन की निरीह जनता पर बम बरसाये जाने का विरोध किया गया। देश में फ़लस्तीन की जनता से एकजुटता व्यक्त करने के प्रयासों के दमन की निंदा की गई। एक अन्य प्रस्ताव में देश में "वॉइस ऑफ हिंद रजब" फिल्म के प्रदर्शन पर प्रतिबंध लगाने का विरोध किया गया। अपने प्रस्ताव में सारिका श्रीवास्तव ने "इतिहास के विकृतिकरण के खिलाफ जन पक्षीय सांस्कृतिक हस्तक्षेप की मांग की। एक प्रस्ताव में मध्य प्रदेश सरकार से सांस्कृतिक गतिविधियों की प्रस्तुति के लिए अनूपपुर में नाटकों के प्रदर्शन हेतु प्रेक्षागृह निर्माण की माँग करते हुए उसे न्यूनतम शुल्क पर उपलब्ध करवाने का अनुरोध किया गया।

              अंतरराष्ट्रीय प्रस्ताव में प्रतिनिधियों ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मदुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस का अपहरण कर जेल में डाले जाने की निंदा करते हुए उन्हें अविलंब रिहा करने की मांग की गई। साथ ही क्यूबा पर लगाये गए दमनकारी प्रतिबंधों को अविलंब समाप्त करने की माँग की गई।

*संगठन सत्र और चुनाव*

             सम्मेलन के संगठन सत्र में महासचिव शिवेंद्र शुक्ला ने अपने कार्यकाल की रिपोर्ट पेश की। उस रिपोर्ट पर विभिन्न इकाइयों से आए प्रतिनिधियों ने अपने विचार रखे। अनूपपुर से विजेंद्र सोनी, अमित पोखरियाल, इंदौर से सारिका श्रीवास्तव, विनीत तिवारी, हरनाम सिंह, जबलपुर से हिमांशु राय, भोपाल से सत्यम पांडे, अशोक नगर से हरिओम राजोरिया, अरबाज, सीमा राजोरिया, गिरिराज सागर से पी.आर. मलैया, भोपाल से अभिषेक अंशु, शहडोल से ओ.पी. गुप्ता, सीधी से सोमेश्वर सिंह, छतरपुर से नीरज शुक्ला  ने अपने विचार रखे।

             विभिन्न सत्रों में बालेंदु परसाई, राजीव शंकर गोहिल, राजेंद्र गुप्ता, निसार अली, गिरीश पटेल, रामदुलारी शर्मा, नीरज खरे, समीक्षा ने भी अपने विचार रखे।

            आगामी वर्षों के लिए कार्यकारिणी का सर्वानुमति से गठन किया गया। 

संरक्षक मंडल में हिमांशु राय, डॉक्टर विद्या प्रकाश, विजय नामदेव,
अध्यक्ष मंडल में विनीत तिवारी, अनिल दुबे, सीमा राजोरिया, हरनाम सिंह, पंकज दीक्षित, विजेंद्र सोनी, 
अध्यक्ष हरिओम राजोरिया, महासचिव शिवेंद्र शुक्ला, कोषाध्यक्ष नीरज खरे, सचिव मंडल में अभिषेक अंशु, सारिका श्रीवास्तव, हूरबानो सैफी, गुलरेज़ खान, आयुष सोनी, 
कार्यकारिणी में रामदुलारी शर्मा, पल्लविका पटेल, आदित्य रुसिया, अफरोज़ ख़ान, प्रमोद बागड़ी, मुकेश बिजौले, अशोक दुबे, सचिन वर्मा, बद्रीश पांडे, योगेश कुशवाहा को निर्वाचित घोषित किया गया।

*जनगीतों की प्रस्तुति*

             सम्मेलन में अशोकनगर, इंदौर, छतरपुर और गुना इकाई के कलाकारों ने विभिन्न अवसरों पर जनगीतों की प्रस्तुति दी। अशोकनगर के हरिओम राजोरिया, सीमा राजोरिया, कबीर, रामदुलारी शर्मा, रतन गुरु पटेल और समीक्षा ने संत कबीर, गिरिजा कुमार माथुर, वामिक जौनपुरी, फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ एवं स्वरचित गीत प्रस्तुत किए।

              इंदौर इकाई के विनीत तिवारी, सारिका श्रीवास्तव, हूर बानो सैफी, नकुल पाल, आयुष अहिरवार, विशाल यादव, राजीव रायकवार ने दुष्यंत कुमार, शैलेंद्र, भूपेन हज़ारिका के गीत गाए।

             छतरपुर के शिवेंद्र शुक्ला, नीरज शुक्ला, नीरज खरे, सर्वेश खरे, मानस गुप्ता, निशांत वाल्मीक, दीपांश रजक ने कृष्णा पांडे का गीत 'मेरी दुनिया को बचा लो' के अलावा बुंदेलखंड का प्रसिद्ध लोकगीत, जो विवाह अवसरों पर गाया जाता है, आगड़ दम बागड़ दम एवं राजेश जोशी की सुप्रसिद्ध कविता मारे जाएंगे... का गायन किया।

*पोस्टर प्रदर्शनी*

              बलराज साहनी नगर स्थित सभागार में कार्टून और पोस्टर प्रदर्शनी लगाई गई। इप्टा इकाई इंदौर की युद्ध-विरोधी पोस्टरों की प्रदर्शनी अशोक दुबे द्वारा तैयार की गई थी। फ़लस्तीन के चित्रकारों और वहाँ के जमीनी हालात के चित्रों की प्रदर्शनी विनीत तिवारी द्वारा लगाई गई। इसके अलावा भोपाल के चित्रकार बालेंदु परसाई, उज्जैन के मुकेश बिजौले, अशोकनगर के पंकज दीक्षित के पोस्टर प्रदर्शित किए गए। आयोजन स्थल पर प्रगतिशील साहित्य के स्टॉल भी लगाए गए थे।

*रैली निकाली गई*

             अनूपपुर की सड़कों पर संस्कृतिकर्मियों द्वारा एक विशाल रैली निकाली गई, जिसमें युद्ध, जातिवाद, सांप्रदायिकता के विरोध में गीत गाये गए, नारे लगाए गए और पोस्टरों के माध्यम से भी अपनी बात कही गई। 

              सम्मेलन के प्रारंभ में आयोजन समिति की अध्यक्ष पल्लविका पटेल, महासचिव लक्ष्मी खेड़िया ने अतिथियों का स्वागत किया। बिरादराना संगठनों प्रगतिशील लेखक संघ के अध्यक्ष सेवाराम त्रिपाठी, महासचिव तरुण गुहा नियोगी, एप्सो के राष्ट्रीय सचिव अरविंद पोरवाल, श्रम संगठन एटक के एस.एस. मौर्य के शुभकामना संदेशों का वाचन कोषाध्यक्ष श्रद्धा सोनी ने किया।

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